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शादीशुदा होने की जानकारी के बाद बने संबंध, धोखाधड़ी नहीं: छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट का अहम फैसला

बिलासपुर, 25 अप्रैल 2026। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने रेप और धोखाधड़ी से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले में साफ किया है कि यदि किसी महिला को पहले से यह जानकारी हो कि संबंधित पुरुष शादीशुदा है और इसके बावजूद वह उसके साथ संबंध बनाती है, तो बाद में वह शादी का झांसा या धोखाधड़ी का आरोप नहीं लगा सकती।

जस्टिस संजय एस. अग्रवाल की एकलपीठ ने निचली अदालत के फैसले को सही ठहराते हुए आरोपी को बरी रखने का आदेश दिया और महिला की अपील खारिज कर दी। खास बात यह रही कि इस मामले में महिला ने खुद ही अपनी पैरवी की।

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क्या था मामला?
डोंगरगढ़ निवासी महिला ने दावा किया था कि उसकी शादी 8 मई 2008 को महेश गंजीर नामक व्यक्ति से हुई थी। बाद में 21 जनवरी 2009 को दोनों के बीच एक इकरारनामा भी तैयार किया गया, जिसके बाद वे साथ रहने लगे और उनके बीच शारीरिक संबंध भी बने।

महिला ने आरोप लगाया कि उसने अलग-अलग मौकों पर करीब 85 हजार रुपए खर्च किए, लेकिन आगे पैसे देने से मना करने पर आरोपी ने उसे घर से निकाल दिया। इसके बाद उसने धोखाधड़ी का केस दर्ज कराया।

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कोर्ट ने क्यों खारिज किया आरोप?
सुनवाई के दौरान निचली अदालत ने पाया कि महिला के बयानों में कई विरोधाभास हैं। शुरुआती शिकायत में शादी की स्पष्ट तारीख नहीं बताई गई थी और मई से सितंबर 2008 के बीच संबंध बनने की बात कही गई थी।

सबसे अहम तथ्य यह सामने आया कि महिला को पहले से ही यह पता था कि आरोपी शादीशुदा है और उसकी पहली पत्नी जीवित है। इसी आधार पर कोर्ट ने माना कि धोखाधड़ी का मामला नहीं बनता।

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कानूनी पहलू
कोर्ट ने कहा कि भारतीय दंड संहिता की धारा 493 के तहत तभी अपराध बनता है जब महिला को यह विश्वास दिलाया जाए कि वह कानूनी रूप से पत्नी है। लेकिन जब दोनों पक्ष वास्तविक स्थिति से अवगत हों, तो धोखे का तत्व साबित नहीं होता। साथ ही कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि ऐसे हालात में किया गया इकरारनामा वैध विवाह नहीं माना जा सकता। इसी आधार पर हाईकोर्ट ने निचली अदालत के फैसले को बरकरार रखते हुए आरोपी को राहत दे दी।

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